Alvida Shayari in Hindi
ख़ुश्बू बन कर मेरी सांसों में बहना,
लहू बन कर मेरी नस-नस में बहना,
दोस्ती होती है रिश्तों का अनमोल गहना
इसलिए दोस्त को कभी अलविदा मत कहना।
दुखो को कह दो अलविदा,
खुशियों का तुम कर लो साथ,
चाँद की यह चाँदनी और तारों की बारात,
लेकर मीठे सपने संग आ गयी है यह रात.
ये दिल जिस पर मरता है,
ये दिल जिस पर होता है फिदा,
अक्सर वही दिल्लगी करके
बड़े प्यार से कह देता है अलविदा।
अपनी जिंदगी का खुल कर मजा लीजिये,
दिल दुखाने वालों को अलविदा कीजिये।
बड़ी अजीब सी है उनकी अदा,
एक पल सलाम, दूसरे में अलविदा।
आधे से कुछ ज्यादा है – पूरे से कुछ कम,
कुछ जिंदगी, कुछ गम, कुछ इश्क़, कुछ हम.
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पूर्ण विराम का मतलब तब समझ में आया,
जब उसने मुस्कुराते हुए अलविदा कह दिया।
खिड़की पुकारती है जाने वालों को,
जिसे दरवाजा कह देता है अलविदा।
कफन में मेरी लाश देखकर रोना मत,
वो आखिरी दीदार होगा, जरा हस कर अलविदा करना।
बिना मुहूर्त के पैदा होकर
जिंदगी भर शुभ मुहूर्त के
चक्कर में फंसा इंसान
एक दिन बिन मुहूर्त के
संसार को अलविदा बोल जाता है.
मैं समझता हूँ आखिर में
सबकुछ जाने देने का नाम ही जिंदगी है,
पर सबसे ज्यादा तकलीफ तब होती है
जब आपको अलविदा कहने का मौका
नहीं मिलता है.
कुछ पल तो ठहर जाओ ना,
या फिर लौट के आओ ना,
यूँ कहते नहीं अलविदा
मुड़ जाओ इधर आओ ना
तुम्हें ढूँढ़े मेरी आँखें
तुम्हें खोजे मेरी बाहें
तुम बिन जिया जाएँ कैसे
कैसे जिया जाएँ तुम बिन.
लगे है इल्जाम दिल पे जो मुझको रूलाते है,
किसी की बेरूखी और किसी और को सताते है,
दिल तोड़ के मेरा वो आसानी से कह गए अलविदा
लेकिन मेरे हालात मुझे बेवफा ठहराते है.
तेरी मोहब्बत से लेकर,
तेरे अलविदा कहने तक,
सिर्फ तुझ को चाहा है
तुझसे कुछ नहीं चाहा।
विदा जो कहूं… तो अलविदा मत समझना,
गुलाब सा रखना मुझे… किसी बंद किताब में।
डूब गए तो किनारों से कहना अलविदा हमें,
उभर गए तो यकीन मानो समुंदर समेट देंगे।
कितना दुश्वार है रिश्तों को अलविदा कहना,
उसने जाते हुए एक बार तो सोचा होता।
मुड़कर नहीं देखते, अलविदा के बाद
कई मुलाकातें बस इसी गुरूर ने खो दीं.
मुद्द्तों तक किया था इन्तजार जिसका,
वो आया लौट के भी तो अलविदा कहने।
अलविदा कह चुके है तुम्हें,
जाओ आँखों पर ध्यान मत दो.
वक़्त से बड़ा कोई मरहम नहीं,
वक़्त से बड़ा कोई दर्द भी नहीं,
न चाहते हुए भी दूर कर देता है ये
वरना, कौन कमबख्त अलविदा कहता।
उस शख्स को अलविदा
कहना कितना मुश्किल है,
जिस ने हमें बहुत सारी यादें दी हो.
ढलती रात का इक मुसाफिर,
सुबह अलविदा कह चला,
जीते जी तेरा हो सका न
मर के हक़ अदा कर चला.
अजीब था उनका अलविदा कहना,
सुना कुछ नहीं और कहा भी कुछ नहीं,
बर्बाद हुए उनकी मोहब्बत में कि
लुटा भी कुछ नहीं और बचा भी कुछ नहीं।

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